रविवार, 31 जनवरी 2016

पुलिस हवलदार ने की चार से शादी, '5वीं को लेकर भागा'

एक हवलदार के खिलाफ उसकी दो पत्नियों ने कथित रूप से एक युवती के साथ भाग जाने की शिकायत दर्ज कराई हैं। पुलिस ने बताया कि चेन्नई सिटी पुलिस में हवलदार के पद पर काम करने वाले 42 साल के अरुनन की वर्तमान में चार पत्नियां हैं और अब उस पर पांचवीं महिला के साथ भागने का आरोप लगा है।



शिकायतकर्ता महिलाओं ने आरोप लगाया है कि अरुनन अपनी चारों पत्नियों से कुल 40 लाख रुपए लेकर युवती के साथ फरार हो गया है। शिकायतकर्ता कलियम्मल को शक है कि अरुनन एक कॉलेज छात्रा के साथ भागा है। बताया गया है कि छात्रा वर्ष 2013 में पल्लीकरानाई में अपने घर से गायब हो गई थी।

अरूनन की एक पत्नी कविता ने उसके खिलाफ बहुविवाह की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आईपीसी की धारा 495, 498 और 420 के तहत केस दर्ज कराया है। जब पुलिसकर्मी सम्मन लेकर पहुंचे तो वह वहां से गायब हो गया। पुलिसकर्मी ने बताया कि वर्तमान में अरुनन के विजिता जूलियट शर्मिला नाम की एक महिला के साथ रहने की जानकारी मिली है।

मुख्य शिकायतकर्ता कविता ने बताया कि अरुनन ने 12 साल पहले विचुर की रहने वाली तिलागवाती से शादी की थी। उसकी एक और पत्नी कविता कोट्टुपुरम की रहने वाली है। कविता के अनुसार, \'उसने मुझे यह कहकर फुसलाया कि उसकी पहली तिलागाती की लंबी बीमारी की वजह से मौत हो गई थी।\' कविता के मुताबिक अरुनन ने उससे 17 लाख रुपए लिए थे। उसने उसके 5 लाख रुपए के गहने भी गिरवी रखवाए थे। अब वो किसी पांचवी महिला के साथ भाग गया है और उसका कहीं कोई पता नहीं चल पा रहा है।


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केवल 50400 रुपए का कर्ज नहीं चुकाया तो मिला 14 साल का वनवास

कलयुग में वनवास सुनने में ही थोड़ा अटपटा लगता है, लेकिन यह सच है। एक व्यक्ति ने सहकारी समिति से लिए 50400 रुपए का कर्च नहीं चुकाया तो समिति ने उसकी 2.29 एकड़ खेत की जमीन नीलाम कर दी। इसके बाद से ही वह 14 साल से जंगल में खड़ी अपनी कार में रह रहा है।



इस कहानी के सामने आते ही जिला प्रशासन ने उसके पुनर्वास की कोशिशें तेज कर दी हैं। चंद्रशेखर गौड़ा नाम के इस व्यक्ति ने वर्ष 1999 में नेल्लुरू कामराजे को-ऑपरेटिव सोसायटी से कर्ज लिया था, लेकिन वे इस कर्ज को चुका नहीं पाए। तब सोसायटी ने वर्ष 2002 में वसूली की कार्यवाही शुरू की। अक्टूबर 2002 में उसकी जमीन 1.2 लाख रुपए में नीलाम कर दी और घर भी जमींदोज कर दिया।

इसके बाद गौड़ा ने सैकंड हैंड कार खरीदी और इसे सुल्लिया के बॉर्डर से सटे जंगल में खड़ा कर इसे ही अपना घर बना लिया। वह पिछले 14 सालों से इस जंगल में हाथों से टोकरियां बनाने का काम करता है और सप्ताह में एक बार 21 किलोमीटर पैदल चल कर सुल्लिया में 40 रुपए प्रति पीस के हिसाब से बेच आता है।


हथिनी ने 600 किलो के भैंसे को सूखे पत्ते की तरह उड़ा दिया


हाथी...एक शांत, मस्त मौला जानवर...लेकिन अगर गुस्सा आ जाए तो...। नतीजा तस्वीर के रूप में आपके सामने है। इस बेचारे भैंसे की गलती सिर्फ इतनी थी कि इसने इस हथिनी का सामना होने पर उसे ललकारने की हिमाकत कर डाली। बस फिर क्या था...गुस्से से भरी इस हथिनी ने करीब 600 किलो के इस भैंसे को एक झटके में अपनी सूंड से लपेटा और हवा में सूखे पत्ते की तरह उड़ा दिया।

Elephant

एक झटके में ही भैंसे के प्राण पखेरू हो गए। लेकिन हथिनी का गुस्सा शांत नहीं हुआ, जमीन पर पटकने के बाद भी उसने अपने भारी-भरकम पैरों से उसे कुचल दिया। केन्या के मसाई मारा नेशनल पार्क में इन क्षणों को 56 वर्षीय फोटोग्राफर किंबर्ली मॉरयर ने अपने कैमरे में कैद किया। 


 
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इस व्यक्ति के हाथ पैर हो गए पेड़ की तरह, कहलाता है ट्री मैन

यह तस्वीर आपको विचलित कर सकती है, लेकिन बांग्लादेश का यह व्यक्ति अजीब बीमारी से पीडि़त है। इस बीमारी की ही वजह से अबुल बजनदार के हाथों-पैरों पर पेड़ की शाखाओं की तरह रचनाएं उग आई हैं। इसकी वजह से लोगों ने उसका नाम भी \'ट्री मैन\' रख दिया है।

हो सकेगी सर्जरी

राहत देने वाली बात यह है कि 26 साल के बजनदार की जल्द ही सर्जरी कर उसे एपिडर्मोडाइस्प्लासिया वेरूसिफोर्मिस नामक इस बीमारी से निजात दे दी जाएगी। डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी से यह छाल हट जाएगी तो बजनदार के शरीर से करीब 5 किलो वजन कम हो जाएगा। इस सर्जरी का पूरा खर्च अस्पताल उठा रहा है। दक्षिणी जिले के खुलना में रहने वाले अबुल ने बताया, \'शुरुआत में मैंने सोचा कि ये नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन धीरे धीरे मैं काम करने में असमर्थ होता चला गया।\' अबुल ने बताया कि 10 साल पहले उनकी उंगलियों पर यह ग्रोथ शुरू हुई थी। अब उनके दोनों हाथों में दर्जनों 2-3 इंच की शाखाएं हैं और पैरों में भी कुछ छोटी-छोटी ग्रोथ है।




रिक्शा चलाता था अबुल

अबुल पहले रिक्शा चलाने का काम किया करता था, लेकिन इस बीमारी के कारण उसे इस काम से निकाल दिया गया। यही नहीं इसके बाद पड़ोसियों ने भी उसे मोहल्ले से बाहर कर दिया। अबुल की इस बीमारे के बारे में डीएमसीएच के निदेशक सामंत लाल सेन ने बताया कि इसे ट्री मैन डिसीज के रूप में जाना जाता है। सामंत ने बताया, \'अबुल सहित पूरी दुनिया में ऐसे केवल 3 ही मामले सामने आए हैं। इंडोनेशिया के एक गांव में इसी बीमारी से पीडि़त एक व्यक्ति का वर्ष 2008 में ऑपरेशन किया गया था। उसके पूरे शरीर में ऐसी ग्रोथ थी।\' यह बहुत ही रेयर जेनेटिक स्किन डिसऑर्डर है, जिसमें प्रभावित इंसान में पेड़ की जड़ों और शाखाओं की तरह स्किन ग्रोथ होने लगती है।


ऑस्ट्रेलिया में 26 वर्षीय महिला ने दिया पांच बच्चों को जन्म


मेलबर्न। हमने कुछ दिन पहले आपको बताया था कि ऑस्ट्रेलिया में एक 26 वर्षीय महिला पांच बच्चों को जन्म देने वाली है, यह अजूबा अब सच हो चुका है। किम तुकी नाम की इस महिला ने हाल ही पर्थ के एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल में चार बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया है। सभी बच्चे स्वस्थ हैं।



तुकी ने अपने पति वेगन के साथ मिलकर अपने बेटे कीथ और उसकी चार बहनों अली, पेनलोप, टिफनी और बेट्रिक्स का स्वागत किया। तुकी को अपने गर्भावस्था के दौरान रोजाना 6000 कैलोरी लेनी पड़ती थी। अस्पताल से छुट्टी मिलने तक विशेषज्ञों का एक दल तुकी की देखभाल करेगा।


शनिवार, 30 जनवरी 2016

मुखिया की हुई मौत तो कटेगी महिलाओं-बच्चों की उंगलियां!

आपने इस दुनिया के कई देशों में प्रचलित प्रथाओं और परंपराओं के बारे में सुना होगा, लेकिन इसके बारे में नहीं, क्योंकि इस प्रथा के शिकार पर जो गुजरता है उसका अंदाजा लगाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा प्रतीत होता है। यह एक ऎसी जगह है जहां यह भयावह प्रथा प्रचलित है। इस प्रथा के तहत परिवार के मुखिया की मौत हो जाने पर उसके परिवार से संबंधित सभी महिलाओं और बच्चों की उंगलिया कुल्हाड़ी काटी जाती है।



पापुआ न्यू गिनिया है होता है ऎसा
मुखिया की मौत होने पर परिवार की महिलाओं और बच्चों की उंगलियां काटने की यह प्रथा पापुआ न्यू गिनिया में रहने वाली डेनी प्रजाति के परिवारों में है। जिसके शिकार हजारों लोग हो चुके हैं।
मृत व्यक्ति के दुखों का होता है बंटवारा
मुखिया की मौत हो जाने पर परिवार की स्त्रियों और बच्चों की उंगलियां कटवाने के पीछे का कारण भी बड़ा अजीब है। डेनी प्रजाति के लोगों का मानना है कि उंगलिया काटने पर मृत्यु को प्राप्त हुए मुखिया की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा महिलाओं और बच्चे उंगलियां कटवाकर मरे हुए मुखिया के उस कष्ट में भागीदार बनते हैं जो उसने मरते समय उठाया था।
सरकार ने लगाई पूरी तरह से रोक
हालांकि उंगलियां काटने की इस प्रथा पर अब न्यू गिनीया सरकार द्वारा पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार ने इस प्रथा पर प्रतिबंध इस तर्क के आधार पर लगाया है कि यह अमानवीय है और मरने वाले दु:ख में कोई भी अपने शरीर का अंग कटवाकर उसमें भागीदार नहीं हो सकता। लेकिन अभी इस प्रथा के शिकार हुए सैंकड़ों लोग वहां बचे हुए है जिनके हाथों की उंगलियां कटी हुई है।

अगर आप जानवर होते तो ऎसी दिखती दुनिया!

क्या आपने कभी सोचा है कि जो दुनिया हमें अपनी आंखों से दिखाई देती है वैसी जानवरों को दिखती है या नहीं। लेकिन अब यदि आप दुनिया को जानवरों की नजर से दुनिया देखना चाहते हैं तो ऎसा हो सकता है। इससे आपको पता चल सकता है कि कौनसे जानवर को दुनिया कैसी दिखाई देती है।
 
 
 
किसी चीज को ज्यादा डिटेल से देखते हैं जानवर-
 
डेली मेल के अनुसार कोई भी जानवर किसी एक चीज को ज्यादा डीटेल के साथ देख सकता है। वहीं कोई जानवर देखने के दायरे को दूसरे जानवर से ज्यादा कवर करता है। आइरिस आर्टिस्ट क्लियरी कोनोली और डेनिस कोनोली ने एल्युमिनियम के ऎसे अनोखे हेलमेट्स बनाए हैं जो जानवरों की आंखों से दुनिया दिखा सकते हैं। इन हेलमेट्स के जरिए विजुअल परशेप्शन की मिस्ट्री को सुलझाया गया है। इससे इन्हें पहनने वाले आदमी को यह आभास हो जाता है कि कौनसे जानवर को दुनिया कैसी दिखाई देती है।
 
360 डिग्री एंगल तक देख सकते हैं-
 
आपको बता दें कि इन विशेष हेलमेट में कैमरे लगाकर आंखे लगाई गई हैं। टेस्टिंग के दौरान इन हेलमेट को पहनकर लोगों को साइकिल चलाने के लिए कहा गया। इसके बाद लोगों ने खुद महसूस किया अगर वे जानवर होते तो क्या होता। इन अनोखे हेलमेट्स को यूनिवर्सिटी ऑफ आयरलैंड ने अपने यहां प्रदर्शनी के लिए रख्खा है। उत्सुक लोग दूर-दूर से आकर इसे देख रहें हैं और पहनकर भी देख रहे हैं। इसमें एक और खास बात ये है कि इन हेलमेट्स की मदद से दुनिया को 360 डिग्री एंगल में भी देखा जा सकता है।
 

मरने के बाद गड़ा मुर्दा एकबार फिर कब्र से बाहर आता है यहां!

क्या आपने कभी मरने के बाद गाड़े गए मुर्दे को कई महीनों बाद फिर से कब्र से बाहर आते देखा है, नहीं ना! लेकिन इस दुनिया में एक ऎसी विचित्र भी है जहां ऎसा होता है। यहां के लोग किसी आदमी के मरने बाद उसे दफना देते हैं और फिर कई दिनों बाद उसे फिर कब्र से बाहर निकालते हैं। मुर्दे को बाहर निकालने वाले, परिवार वाले और रिश्तेदार मिलकर उसके साथ डांस करते हैं।



मेडागास्कर में होता है ऎसा-

गाड़े गए मुर्दे को बाहर निकालकर उसके साथ डांस करने वाले लोगों की यह जगह दक्षिण अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित मेडागास्कर द्वीप है। यहां मेलागासी प्रजाति के लोग अपने समाज में मरने के वाले किसी भी व्यक्ति को एकबार कब्र में दफनाने के बाद उसे फिर से वापस निकालते हैं। कब्र से बाहर निकाले गए व्यक्ति के साथ नाचते गाते हैं और फिर वापस दफना देते हैं।

एकबार फिर वापस आती है आत्मा-

मेडागास्कर में रहने वाले मेलागासी प्रजाति के इन लोगों की यह एक रस्म है। इसके तहत माना जाता है कि मरने के बाद कब्र में दफनाया गया इंसान एकबार फिर जिंदा होता है। उसे अपनत्व देने के लिए ये लोग उसे फिर कब्र से वापस निक ालते हैं। हालांकि मुर्दा वास्तव में जिंदा नहीं होता, लेकिन इन लोगों का मानना है एकबार फिर उसमें आत्मा वापस आती है। इस अनोखी रस्म के तहत एकबार गड़े मुर्दे के की हडि्डयों को बाहर निकालकर उसे फिर से नहला कर कपड़े में पैक करते हैं। इसके बाद सभी लोग उसके चारों तरफ घूम-घूम कर नाचते गाते हैं। यह रस्त होने के बाद फिर से मुर्दे की हडि्डयों को वापस कब्र में गाड़ दिया जाता है। इस रस्म के बाद भी उस इंसान की मुक्ति होना माना जाता है।

यहां दिखा उड़ने वाला सांप

उड़ने वाले सांपों के बारे में आपने किस्से-कहानियों में ही सुना होगा, लेकिन ये बात सच है। उड़ने वाले सांपों के बारे में बताने वाली कहानियों की बात तब सच हो गई है जब हाल ही में एक उड़ने वाले सांप को देखा गया। यह सांप अब तक देखे गए सभी प्रजाति के सांपों से बिल्कुल अलग और अनोखा है। इसकी सबसे खास बात तो उड़ना है, जबकि अब तक पाए गए सभी सांप सिर्फ रेंग कर या फिर उछल-उछल कर दूसरे स्थान पर पहुंचते हैं।



आंध्रप्रदेश के जंगल में मिला-

एक स्थान से दूसरे स्थान तक उड़कर पहुंचने वाला यह अनोखा और अजीबोगरीब किस्म का सांप हाल ही में आंध्र प्रदेश के सेसाचलम के जंगलों में देखा गया है। किस्से-कहानियों में भी कहा जाता है कि उड़ने वाले सांप चंदन के पड़ों पर रहते हैं, ऎसे में यह वही इलाका है जहां चंदन के पेड़ पाए जाते हैं। वन अधिकारियों और अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक यह सांप क्रिसोपेलिया प्रजाति का है जो उड़ने में सक्षम है।

श्रीलंका से आया ये सांप-

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक आंध्र प्रदेश के सेसाचलम के जंगलों में देखा गया यह उड़ने वाला सांप श्रीलंका के शुष्क इलाकों और मध्यम जलवायु वाले इलाकों में पाया जाता है तथा दुर्लभ प्रजाति का है। उनका कहना है कि श्रीलंका के अलावा किसी दूसरी जगह पर इस सांप को पहली बार देखा गया है। माना जा रहा है कि श्रीलंका से यह सांप आंध्रप्रदेश उड़कर ही आया है। इसके अलावा जैव विविधता से संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिका चेकलिस्ट ने भी इस बात का समर्थन किया है तथा उसके ताजा अंक में इसका खुलासा किया है।

रात के समय भरते हैं उड़ान-

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक इस प्रजाति के सांप रात्रिचर यानि रात के समय ही उड़ते हैं। दिन के समय ये सांप अपना वक्त चंदन के पेड़ों से लिपटकर काटते हैं तथा दूसरे स्थान पर उड़कर जाने के लिए रात्रि का समय चुनते हैं।

परछाई पड़ने पर हो सकता है लकवा-

किस्से-कहानियों में भी बताया जाता है कि यदि किसी इंसान पर उसकी परछाई पड़ जाए तो उसे लकवा मार जाता है। हालांकि इस बात को अभी तक इस बात को विज्ञानिकों को की तरफ से कोई समर्थन नहीं मिला है क्योंकि ऎसा अभी तक ऎसा कोई केस सामने नहीं आया है।

अनोखी है यहां की परंपरा, जिंदा आदमी खुद को बनाता है ममी

आपने अब तक कई तरह के रीति-रिवाजों के बारे में सुना होगा, लेकिन ऎसा नहीं, क्योंकि यह सबसे अनोखा और भयानक है। हम आपको बता रहे है दुनिया के एक ऎसे देश के बारे में जहां प्रचलित एक अनोखी और भयावह पंरपरा के बारे में जहां एक जिंदा इंसान अपने आपको ममी बना देता है। इसके लिए उसे अपने आपको जीते जी ही कीड़ों-मकोड़ों का भोजन बनाना होता है।
 
 
 
जापान में होता है ऎसा-
 
जिंदा इंसान को ममी बनाने की यह परंपरा जापान में हैं। इस देश के उत्तरी भाग में कई ऎसे बौध मठ है जिनमें सोकूशिंबूत्सु नाम से जाने जाने वाले बौद्ध भिक्षु ऎसा करते हैं। इस संप्रदाय में सैंकड़ों सालों से होता आ रहा है तथा कई भिक्षु जीते जी अपने आपको ममी बना चुके हैं। हालांकि ऎसा करने में सफल होने वाले भिक्षु को भगवान के बराबर दर्जा दिया जाता है और उसकी पूजा होती है।
 
बौद्ध भिक्षु ने शुरू की थी परंपरा-
 
जीते जी इंसान को ममी बनाने की यह परंपरा आज से लगभग 1000 साल पहले कूकाई नाम के एक पुजारी ने वाकायामा प्रांत के माउंट कोया स्थित मंदिर से शुरू की थी। कूकाई ने ही बौद्ध धर्म में शिंगोन नाम से एक पंथ की स्थापना भी की थी। इसके बाद इस पंथ को मानने वाले बौद्ध भिक्षुओं में इस परंपरा का चलन बढ़ता ही गया और एक के बाद एक सैंकड़ों जिंदा भिक्षु ममी बनते गए।
 
पहले करनी होती है प्रेक्टिस-
 
जिंदा इंसान का ममी बनना कोई आसान काम नहीं, बल्कि इसके लिए पहले कई सालों तक प्रेक्टिस करनी होती है। जिस भिक्षु को ममी बनना होता है उसे पहले इसकी घोषणा करनी होती है। इसके बाद से ही उसे अगले 1000 दिनों तक स्पेशल डाइट पर रहना होता है जिसमें उसे खाने के लिए फली के बीज और अन्य कई तरह के बीज दिए जाते हैं। इस कठोर आहार नियम का पालने पर शरीर की सारी चर्बी निकल जाती है। इसके बाद फिर अगले 1000 दिनों तक उस भिक्षु को ऊरूषी नाम से वृक्ष से बनी जहरीली चाय पिलाई जाती है। इससे उस भिक्षु को जबरदस्त उल्टियों होती है तथा शरीर का सारा पानी, खून और तरल पदार्थ सूख जाता है और बचती है तो केवल चमड़ी और हडि्डयां।
 
पूजा जाता है भगवान की तरह-
 
हडि्डयों के ढ़ांचे बन चुके भिक्षु में फिर भी प्राण होते हैं। इसके बाद शुरू होती है असली सेल्फ ममीफिकेशन की प्रक्रिया। जी हां, इसके बाद उस भिक्षु को पत्थर से बनी एक छोटी सी समाधि में हवा का एक सुराख बनाकर एक ही मुद्रा में बैठाकर बंद कर दिया जाता है। इसके बाद उसे दूसरी दुनिया का इंसान मान लिया जाता है। फिर वो भिक्षु जब तक प्राण रहते हैं तब तक रोज घंटी बजाकर यह बताता है कि वो अभी जिंदा है। जिस दिन घंटी बजना बंद हो जाती है उस दिन समाधि में हवा के सुराख को भी बंद कर अगले 1000 दिन तक फिर सील कर दिया जाता है। यह समय गुजरने पर उस भिक्षु को फिर से वापस निकाला जाता है और उसका ममीफिकेशन पूरा होना मान लिया जाता है। उसे दर्शनों के लिए मंदिर में लेजाकर रख दिया जाता है और पूजा की जाती है। हालांकि आपको बता दें कि जापान की सरकार ने अब इस परंपरा अब रोक लगा दी है।
 

गजब! यहां एक ही दिन में 16 बार आया नया साल

1 जनवरी को पूरी दुनिया ने नया साल एक ही बार मनाया, लेकिन दुनिया में एक ऎसी जगह भी जहां एक ही दिन में 16 बार आया नया साल। यह आश्चर्यजनक कोई और नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) हैं।



16 बार लगाया पृथ्वी कार चक्कर-

आईएसएस में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों ने बुधवार रात 16 बार नया साल मनाया । ऎसा इसलिए क्योंकि अंतरिक्ष स्टेशन आधी रात में 16 सोलह बार पृथ्वी के एक हिस्से के ऊपर से गुजरा। नासा के मुताबिक आईएसएस के माध्यम से पृथ्वी का चक्कर लगा रहे अभियान 42 के सदस्यों को 16 बार नया साल मनाने का मौका मिला।

28163 किलोमीटर प्रति घंटे की है गति-

आईएसएस 28163 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से धरती का चक्कर लगा रहा है। अभियान दल के सदस्य नए साल की शाम को विभिन्न परीक्षणों में लगे थे, जिनमें अंतरिक्ष यान में लंबे समय तक रहने पर इंसान की आंखों में होने वाले बदलाव आदि शामिल थे। अभियान दल के सदस्य अगले मालवाहक यान के आगमन की तैयारी में भी जुटे थे। स्पेस एक्स-5 और ड्रैगन अंतरिक्ष यान आईएसएस पहुंचने वाले हैं।

यहां दुल्हन को गोद में लेकर गुजरना होता है अंगारों से!

भारत में जहां शादी होने के बाद दूल्हा अपनी नई नवेली दुल्हन को हाथ पकड़कर घर में बड़ी आसानी गृह प्रवेश कराता है, वहीं इस दुनिया में एक देश ऎसा भी है जहां दुल्हन को घर में प्रवेश कराने से पहले दूल्हे की जान पर ही बन आती है। यहां नवेली दुल्हन को घर में प्रवेश कराने से पहले दूल्हे को उसे अपनी गोद या पीठ पर बिठाकर दहकते अंगारों से होकर गुजरना होता है।



बहुत पुरानी है परंपरा-

दूल्हे के घर में पहली बार प्रवेश करने से दूल्हे द्वारा दुल्हन को गोद में लेकर अंगारों से गुजारने की यह परंपरा चीन में है और बहुत ही पुरानी है।

प्रसव पीड़ा से बचाने के लिए होता है ऎसा-

दुल्हन को गोद में लेकर दूल्हे द्वारा दहकते अंगारों से होकर गुजरने की इस परंपरा के पीछे का कारण भी चौंकाने वाला है। ऎसा माना जाता है कि दूल्हे द्वारा ऎसा करने पर दुल्हन के प्रेग्नेंट होने के बाद उसे प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है।

गजब! एक कंपनी ने लोगों को ऑनलाइन बेच डाला "गोबर"

हालांकि आजकल ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ चुका है जिसके तहत लोग हर तरह की चीज खरीदते है, लेकिन क्या कोई गोबर भी खरीद सकते हैं। लेकिन यह सच है क्योंकि यहां न कोई सरप्राइज था और न ही कोई धोखा, लेकिन फिर भी एक कंपनी ने सबके सामने लोगों को गोबर बेच डाला। इतना ही नहीं बल्कि लोगों ने भी इसे इतनी उत्सुकता के साथ खरीदा की हजारों क्विंटल गोबर मात्र 30 मिनट में बिक गया।



अमरीकी कंपनी ने किया ये अनोखा काम

गोबर बेचने की यह अनोखी घटना अमरीका में हुई है। यहां कि कार्डस अगेंस्ट ह्यूमिनिटी कंपनी ने अपनी वेबसाइट के जरिए इस काम को अंजाम दिया। हालांकि कंपनी ने अपने विज्ञापन में साफतौर पर कहा था कि वो बुलशिट यानी गोबर बेचने जा रहे हैं। फिर भी 30 हजार अमेरिकी लोगों ने धड़ाधड़ ऑर्डर दे डाला। केवल 30 मिनटों में ही सारा का सारा गोबर ऑउट ऑफ सेल हो गया।

बेचने से पहले कह दिया था कि गोबर है

इस कंपनी ने गोबर को शानदार बॉक्स में पैक करके डिलीवरी दी। आपको बता दें कि गोबर के एक बॉक्स की कीमत करीब 384 रूपये थी। हालांकि यह गोबर लेने के बाद लोगों को काफी हताश होना पड़ा साथ ही अपनी गलती पर भ्भी काफी अफसोस हुआ।

सरप्राइज के चक्कर में खरीद लिया

कार्डस अगेंस्ट ह्यूमिनिटी एक गेम बनाने वाली कंपनी है। अमरीका में थैंक्स गिविंग डे के बाद का शुक्रवार ब्लैक फ्राइडे कहा जाता है। इसी के साथ क्रिसमस शॉपिंग सीजन की शुरूआत होती है और लोग जमक र खरीदारी करते हैं। बस इसी मौके पर चौका लगाते हुए कंपनी ने अपने सारे गेम साइट पर से हटा लिए और केवल "बुलशिट बॉक्स" को सेल पर रखा। इसके लिए कंपनी ने दलील भी दी कि उन्होंने बाकी गेम इसलिए हटा लिए हैं ताकि लोग फिजूलखर्ची ना करें और केवल एक ही चीज खरीदें। वहीं लोगों ने इसे प्रैंक माना और सोचा कि कोई सरप्राइजिंग चीज मिलने वाली है। हालांकि उन्हें सरप्राइज भी मिला लेकिन अलग रूप में। जब लोगों के घर शानदार पैकिंग में गोबर पहुंचा तो हक्के-बक्के रह गए।

शुक्रवार, 29 जनवरी 2016

बॉयफ्रेंड ने तोड़ा दिल तो घर बेचकर निकली दुनिया घूमने

लंदन। ब्रेकअप के सदमे से बाहर आने के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते, लेकिन यहां मैनचेस्टर शहर में रहने वाली एक युवती ने जो किया वह हर किसी के बस की बात नहीं। केटी कोलिंस ने प्यार में धोखा मिलने के बाद न केवल अपनी नौकरी छोड़ दी, बल्कि अपना घर बेचकर वह दुनिया घूमने निकल पड़ी।



एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक 30 वर्षीय केटी कोलिंस एयरपोर्ट पर बतौर पब्लिक रिलेशन (पीआर) काम करती थी। केटी और उनके बॉयफ्रेंड की जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी, लेकिन एक दिन अचानक बॉयफ्रेंड ने केटी से ब्रेकअप कर लिया। प्यार में धोखा मिलने के बाद बेहद उदास रहने वाली केटी ने नौकरी छोड़ दी और घर भी बेच दिया। हाथ में मोटी रकम आने के बाद केटी एशिया के तमाम देशों के भ्रमण पर निकल पड़ी। केटी ने इस दौरान भारत, नेपाल, थाईलैंड आदि देश घूमे।

केटी ने बताया, \'मेरे बॉयफ्रेंड से धोखा मिलने के बाद मैं काफी दुखी हो गई थी। रोजाना अकेली बैठकर रोती रहती, लेकिन फिर एक दिन मैंने सबकुछ भूलकर दुनिया घूमने की ठानी और वह भी अकेले। दुनिया घूमने के लिए मैंने अपने घर को बेच दिया, नौकरी छोड़ी और जो पैसे मिले उससे टिकट बुक कर लिए।\'

बता दें कि केटी ने अंगेजी और पत्रकारिता में डिग्री ली है। केटी कई देशों की यात्रा करने के साथ ही एक ब्लॉग भी अपडेट करती हैं। इस ब्लॉग में वे यात्रा संबंधित तमाम जानकारियां पाठकों को देती हैं। केटी की कहानी से प्रभावित होकर दुनिया के जाना माना पब्लिशर हार्पर कोलिंस ने केटी की तीन किताबें प्रकाशित करने का फैसला लिया है। इन किताबों में केट और उनकी यात्राओं से जुड़ी तमाम जानकारियां होंगी।

पानी के ऊपर दौड़ सकता है यह व्यक्ति

नई दिल्ली। आपने पानी में तैरते हुए तो बहुत लोगों को देगा होगा, लेकिन क्या आपने कभी किसी को पानी के ऊपर दौड़ते हुए भी देखा है। लंदन में रहने वाले स्कैफोल्डर स्कॉट क्रॉस्बी ने यह कर दिखाया है।



पेशे से जादूगर क्रास्बी ने हाल ही 125 मीटर लंबे स्विमिंग पूल पर दौड़ लगाई। उनके इस करतब के बाद से उन्हें लोग जादुई युवक कह रहे हैं। नॉर्थबरलैंड के रहने वाले क्रॉस्बी सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हो चुके हैं। क्रास्बी ने बताया कि उन्होंने इस करतब का पहले से अभ्यास भी नहीं किया था और पहली बार में ही उन्होंने यह खेल कर दिखाया।

दरअसल इस खेल के पीछे एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। स्विमिंग पूल के पानी पर मोनोफ्लेक्स पॉलिस्टर की झिल्ली के समान पतली परत लगाई गई थी। इसे पकड़ पाना काफी मुश्किल था, लेकिन इस पर दौड़ लगाना आसान।

72 साल बाद वैलेंटाइन से मिलेगा 93 वर्षीय सैनिक

लंदन। वर्ष 1944 के World War II में हिस्सा लेने वाला अमरीकी सैनिक 70 साल बाद अपनी प्रेमिका से दोबारा मिलने जा रहा है। नॉरवुड थॉमस 93 साल के हो चुके हैं। वह 88 वर्षीय अपनी प्रेमिका जॉयसी मोरिस से मिलने के लिए अगले माह वैलेंटाइन डे पर ऑस्ट्रेलिया जा रहे हैं। थॉमस ने बताया कि वह मॉरिस को निजी रूप से देखकर बहुत खुशी महसूस करेंगे। दोनों ने हाल ही स्काइप के जरिए बात की थी। बात करते हुए उन्होंने उस समय को याद किया, जब वे साथ में इंग्लैंड में मिले थे। इसके कुछ महीने बाद उन्हें अपनी 101 एयरबोर्न डिवीजन के साथ फ्रांस के नॉर्मेंडी में भेज दिया गया था। मोरिस वर्तमान में वह ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं।



लंदन में मिले थे

वर्ष 1944 में बसंत ऋतु में 21 वर्षीय थामस 17 वर्षीय मोरिस से पहली बार मिले थे। उस समय अमरीकी सैनिक थामस लंदन के बाहरी इलाके में तैनात थे। दोनों को जल्द ही प्यार हो गया था, लेकिन युद्ध के बाद दोनों की राहें अलग-अलग हो गईं थीं। उसके बाद से दोनों नहीं मिल पाए। मॉरिस की अब तक आंखों की रोशनी काफी जा चुकी है।

पैसे नहीं थे इसलिए नहीं मिले

थामस के बेटे ने दोनों को दो माह पहले स्काइप के जरिए बातचीत कराई। इस दौरान थामस ने मोरिस के करीब दो घंटे तक बात की। मोरिस ने अपने पुराने प्यार से मिलने की इच्छा जताई लेकिन थामस को स्वास्थ्य समस्याएं हैं और वह एक निश्चित आय के साथ अमरीका के वर्जीनिया बीच में रहते हैं। इसलिए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जाने में असमर्थता जताई।

एयर न्यूजीलैंड मुफ्त यात्रा कराएगा

एयर न्यूजीलैंड ने थॉमस और उनकी देखभाल करने वाले बेटे स्टीव को मुफ्त में ऑस्ट्रेलिया भेजने की व्यवस्था की है। थॉमस ने कहा कि वह लोगों की दयालुता को देखकर चकित हैं।

300 से अधिक लोगों ने फंड जमा किए

थामस-मोरिस को दूसरा मौका तब मिला जब दोनों को मिलाने के लिए सैकड़ों लोगों ने फंड जमा किए। इस दौरान 300 से अधिक लोगों ने डोनेशन दिए। अन्य ने थॉमस को सीधे चेक भेज दिए। अभी तक 7500 डॉलर से अधिक (5 लाख रु.) की राशि जमा हो चुकी है।

उम्र 60 वर्ष, 4 घंटे, 23 हार्ट अटैक, फिर भी बच गया

कोच्चि। उस बुजुर्ग को चार घंटे में 23 बार हार्ट अटैक आया, लेकिन उसे कुछ नहीं हुआ। उम्र के छह दशक पार कर चुके अजीत अपने सात साल के पोते के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। तभी उन्हें सीने में दर्द हुआ। चार घंटे लगातार रुक-रुककर दर्द होता रहा लेकिन वे इसे नजरअंदाज करते रहे। धूम्रपान के आदी अजीत को सीने में दर्द के बाद जब पास के हॉस्पिटल ले जाकर ईसीजी कराया तो पता चला कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। लगातार अटैक से उनके दिल ने कई बार काम करना भी बंद कर दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें दूसरे बड़े अस्पताल ले जाया गया।



अब नया जीवन शुरू करूंगा

अजीत ने कहा, मैं इस नए जीवन को बेहतर बनाना चाहता हूं। रोज सुबह 20 मिनट की वॉक करता हूं और डॉक्टरों के डाइट चार्ट पर अमल करता हूं।

डॉक्टर भी अचरज में

अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ भी अजीत के चमत्कारिक रूप से बचने से हैरत में पड़ गए। डॉ. अनिल कुमार ने बताया, मैंने मेडिकल कॅरियर में ऐसी घटना के बारे में नहीं सुना कि किसी को चार घंटे में 20 से ज्यादा बार अटैक आया हो और वह सकुशल रहा हो। डॉक्टर्स की टीम ने अजीत के दिल के ब्लॉक को स्टेंटिंग के जरिए हटाया।

इन महिलाओं ने किया एलियंस के 13 बच्चों की मां होने का दावा

वॉशिंगटन। एलियंस हैं या नहीं इन दोनों ही बातों की आज तक कभी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन दुनिया अभी इस गुत्थी को सुलझा भी नहीं पाई थी कि अमरीका की दो महिलाओं ने चौंकाने वाला खुलासा कर दिया। इन महिलाओं का दावा है कि उन्होंने एलियंस के साथ न केवल शारीरिक संबंध बनाए, बल्कि उनके 13 बच्चों को जन्म भी दे चुकी हैं।

अमरीका के शहर लॉस एंजेलिस में रहनी वाली ब्रिगेट नीलसन एरिजोना और एलुना वर्स ने दावा किया है कि वे एलियंस के बच्चों को जन्म दे चुकी हैं। एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट के मुताबिक एलियन से शारीरिक संबंध बनाने के बारे में इन महिलाओं ने कहा कि यह उनका सबसे अच्छा अनुभव था।



नीलसन और एलुना हाइब्रिड बेबी समुदाय की सदस्य भी हैं। इस समुदाय की सदस्य होने की वजह से ही दोनों का मानना है कि उनके बच्चे अंतरिक्ष में एलियंस के साथ ही रहते हैं। नीलसन का कहना है कि एलियन सिर्फ उन्हीं महिलाओं को ले जाते हैं, जो जाना चाहती हैं और फिर संबंध बनाना चाहती हैं। उनके मुताबिक वो अपने पिता के साथ रहती हैं, लेकिन हमेशा ही उनका एलिया के साथ संपर्क बना रहता है।

हाइब्रिड बेबी समुदाय की महिलाओं ने अपने बच्चों के कुछ चित्र भी बनवाए हैं। इन चित्र में दिख रहे बच्चे इंसान की तरह हैं, लेकिन उनकी आंखें काली और काफी बड़ी हैं। इन तस्वीरों और इन महिलाओं के दावे को सच साबित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं दिया गया है।

इस व्यक्ति ने बना डाला अपना देश, जारी किया पासपोर्ट

वॉशिंगटन। आपको सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि इतनी बड़ी दुनिया में कोई एक व्यक्ति अपने लिए अलग से देश कैसे बना सकता है, लेकिन यह सच है। अमरीका में ऊटा के पास एक रेगिस्तान में जैक लैंडसबर्ग नाम के इस व्यक्ति ने अपना देश बनाया है। जैक ने इस देश का नाम \'रिपब्लिक ऑफ जाकिस्तान\' रखा है और यहां आपको जाने के लिए पासपोर्ट की भी जरूरत पड़ेगी। यही नहीं जैक खुद को इस देश का राष्ट्रपति भी बताता है।



चार एकड़ में बने इस देश को अब तक कहीं भी मान्यता नहीं मिली है। इस देश से नजदीकी शहर 96 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि सड़क 24 किलोमीटर दूर है। इस जमीन को जैक ने करीब 15 साल पहले ऑनलाइन खरीदा था। वह इसे एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में बनाना चाहता था। जैक ने जाकिस्तान की सुरक्षा के लिए रोबोट गार्ड की व्यवस्था भी की है। वहीं यहां के लिए पासपोर्ट भी जारी किया है।

जाकिस्तान की सीमा में प्रवेश के दौरान आपके पासपोर्ट में मोहर लगाने का भी प्रावधान है। जैक ने अपने इस देश का मोटो \'समथिंग फ्रॉम नथिंग\' रखा है, हालांकि जैक खुद वहां नहीं रहते हैं, लेकिन साल में एक दो बार वहां जरूर जाते हैं। उनके दोस्त भी अक्सर वहां घूमने आते हैं और उन्हें भी जैक का ये देश शानदार लगता है।

इस शख्स को शराब ऐसी चढ़ी की 7 करोड़ में खरीद ली आलू की फोटो!

एक मशहूर फोटोग्राफर ने एक आयरिश आलू की तस्वीर 7 करोड़ 25 लाख 65 हजार 740 रूपए में बेची है। 46 साल के केविन अबॉश ने इसकी पुष्टि की है कि उन्होंने ब्लैक बैकग्राउंड पर ऑर्गेनिक आलू की एक तस्वीर को एक गुमनाम यूरोपीयन बिजनसमैन से बेचा है। अबॉश का कहना है कि यह तस्वीर 2010 में खींची गई थी। इस तस्वीर के साथ फोटोग्राफर के पोर्टफोलियो में स्टीवन स्पिलबग, मिशेल पालिन और फेसबुक की शेर्यल सैंडबग के साथ मलाला यूसुफजई हैं।

 
अबॉश की तस्वीरों पर कम से कम 19336829 रूपए कमिशन के रूप में लिए जाएंगे। यहां आलू की तीन तस्वीरें थीं- एक उनके प्राइवेट कलेक्शन से में थी, दूसरी सर्बिया के आर्ट म्यूजियम को दी गई थी और तीसरी किसी गुमनाम बिजनसमैन से बेची गई है। अबॉश के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब किसी ने उनकी आर्ट तस्वीर को खरीदा है।
अबॉश का कहना है कि वो एक व्यक्ति के साथ वाइन पी रहे थे, तब दूसरे व्यक्ति ने उनसे कहा यह तस्वीर उसें बहुत पसंद आई। इसके बाद दो और ग्लास वाइन पी और फिर उसने कहा मैं इसे सच में चाहता हूं। हमलोगों ने दो हफ्ते बाद तस्वीर की कीमत फिक्स की। बॉश का कहना है कि उन्हें किसी भी एक तस्वीर के लिए सबसे ज्यादा रकम मिली है। इस आयरिश फोटोग्राफर का ज्यादातर काम ब्लैक बैकग्राउंड पर है। इनकी तस्वीरों की मांग अमीरों और जाने-माने लोगों के बीच खूब है। पिछले हफ्ते इन्हें वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम दावोस में आमंत्रित किया गया था।
 

गजब! बीवी को खुश करने के लिए पति ने हाथ में फिट करवाई खोपड़ी

आज आज तक एक से बढ़कर एक टैटू और पियर्सिंग के शौकीनो के बारे में सुना होगा, इस एक ऐसा जोड़ा भी है जो टैटू और पिरसिंग का लती हैं। इस कपल के पूरे बदन पर डरावने टैटू और पियरसिंग हैं।
 

हाथ में इंप्लांट करवाई खोपड़ी
हम आपको बता रहे हैं ब्रिटेन के रहने वाले ली हॉजसन और उनकी पत्नी स्टेफनी के बारे में जिन्होंने अपनी शादी की सालगिरह के मौके पर कुछ अलग किया। �इस मौके पर ब्रिटेन के बर्मिंघम के किंगस्टैंडिंग में रहने वाले ली ने अपने हाथों में एक खोपड़ी को इंम्‍प्लांट करवाया।
बीवी की इच्छा पूरी करने के लिए किया
ली की पत्नी चाहती थी कि वो शादी की सालगिरह के मौके पर ऐसा करवाएं। ली हॉजसन और उनकी पत्नी स्टेफनी एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। इस कपल ने अपनी शादी की सालगिरह मनाई हाल ही में मनाई है, लेकिन इसबार उन्होंने कुछ ऐसा किया है जो चौंकाने वाला है।
ऐसे होती है शरीर में खोपड़ी इंप्लांट
बता दें कि शरीर के अंदर कुछ भी इंम्‍प्लांट करवाने वाली प्रोसेस को बॉडी मॉड भी कहते हैं। इसमें शरीर की चमड़ी को काटकर उसमें सिलिकॉन से बनी उस चीज को भर दिया जाता है, जैसे व्यक्ति चाहे। ये सुरक्षित नहीं होता और भारी इंफेक्‍शन का पूरा खतरा होता है।
टैटू की लगी है लत
स्टैफनी ने कहा कि जब उसके 21वें और 22वें जन्मदिन पर ली ने गले और छाती पर टैटू करवाया था। वहीं ली के 24वें जन्मदिन पर स्टेफनी ने अपने बाजू पर टैटू करवाया। अब शादी की सालगिरह आने पर उन्होंने बॉडी इंम्‍प्लांट करवाने की ठानी और ली से इसकी शुरूआत हुई। इस मौके पर स्टेफ और ली काफी खुश दिखे।
 

एकसाथ 5 पांच बच्चों को जन्म देगी ये महिला, इंटरनेट पर हुई वायरल

पर्थ। अब तक आपने किसी महिला द्वारा एकसाथ दो बच्चों को जन्म देने के बारे में ही सुना होगा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की एक महिला एकसाथ पूरे पांच बच्चों को जन्म देने जा रही है। पर्थ की रहने वाली 26 वर्षीय किम टूसी 29 सप्ताह से गर्भवर्ती हैं और वो इस बार एकसाथ 5 जुड़वां बच्चों को जन्म देने जा रही है।
 
दो जवान बेटियों की है मां
 
बता दें कि किम पहले से ही दो जवान बेटियों की मां हैं, लेकिन इस बार वो एकसाथ पांच बच्चों को जन्म देने की बात को लेकर बहुत उत्साहित हैं। पहली बार डॉक्टर से चेक कराने पर किम को इस बात का पता चला तो वो चौंक गई थी।
 
 
 
6000 किलोरीज की खपत
 
किम का कहना है कि उनके गर्भ में पल रहे पांच 5 बच्चों एकदिन में 6000 किलोरीज की खपत कर रहे हैं, इसके लिए उन्हें स्पेशल डाइट लेनी पड़ रही हैं। किम के पति भी इस बात को लेकर काफी उत्साहित हैं।
 
इंटरनेट पर वायरल
 
इसमें एक और बात ये है पांच बच्चों की मां बनने जा रही किम अपनी स्पेशल डाइट और खाने-पीने से जुड़ी बातें अपने ब्लॉग पर शेयर कर रही है। उनके ब्लॉग के 123000 फॉलोअर्स हैं जों यह बात जानकर काफी उत्साहित हैं। किम के बेबी बंप वाले फोटोज भी इंटरनेट पर काफी वायरल हो रहे हैं।
 

ये है दो मुंह वाला इंसान, एक सोता है तो दूसरा जागता है

लंदन। अब आपने दुनिया में काफी अजीबो गरीब किस्से सुने और देखे होंगे, जैसे कभी एक शरीर और दो सिर जुड़े हुए । लेकिन कभी ऎसा भी सुना है कि किसी किसी व्यक्ति के एक ही सिर में दो चहरे हों। लेकिन इस दुनिया में ऎसा एक व्यक्ति भी हुआ है। एक सिर और दो चेहरे वाला यह व्यक्ति अपने जमाने में काफी चर्चित भी रहा।




इंग्लैड का है ये व्यक्ति
 इंग्लैंड में रहने वाले एक व्यक्ति जिसका नाम एडवर्ड मोर्दकै था जो अपने दो मुंह और एक सिर के साथ पैदा हुआ था। हालांकि वह अपनी इस अजीबोगरीब स्थित से परेशान था क्योंकि उसका दो मुंह वाला सिर अगर एक सोता तो दूसरा छींक ता था। हालांकि मोर्दकै का दूसरा मुंह छींकने और हंसने के अलावा और कोई प्रतिक्रियाएं नहीं करता था।
लोगों ने माना शैतान का रूप
 लोगों ने तो मोर्दकै के दूसरे मुंह को शैतान का रूप कहना शुरू कर दिया था । इसके अलावा मोर्दकै ने दूसरे सिर को अपने से अलग करने के लिए डॉक्टर से भी कहा लेकिन कोई भी डॉक्टर उनके दूसरे मुंह की सर्जरी करने के लिए तैयार नही हुआ।

कर ली आत्महत्या

अपने दो चेहरों से परेशान होकर एडवर्ड मोर्दकै ने 23 वर्ष की आयु में आत्महत्या कर ली। लोगों का मानना हैं उसके मरने के बाद उसका शैतानी चेहरा कुछ फुसफुसाने लगा था।

ये क्या, यहां लड़के और लड़की की होती है कुत्ते से शादी

झारखंड। आपको बता रहे है एक अनोखी शादी के बारे में, ऐसी शादी जिसे सुनकर आप चौक जाएंगे। एक 7 साल के लड़के की शादी कुत्ते के साथ की गई, जी हां आप बिल्कुल सही पढ़ रहे है। एक लड़के की शादी कुत्ते से। वो भी कहीं और नहीं अपने ही देश में। जी हां ये कहानी है झारखंड के ग्रामीण इलाके की, जहां एक सात साल के लड़के को कुत्ते से शादी करने को मजबूर होना पड़ा। ये इसलिए किया गया क्योंकि उसके राशि में लिखा था कि उसकी पहली पत्नी जल्द मर जाएगी। इस घटना को टालने के लिए घर वालों ने मुकेश केराई की शादी कुत्ते से कर दी।
 
 
क्यों की जाती है कुत्ते से शादी 

जब पहली बार बच्चे के दांत आते हैं तो घरवालों के लिए, माता-पिता के लिए यह खुशी का क्षण होता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए बच्चों का दांत आना परेशानी की बात हो जाती है। मूलत: ओडिशा और झारखंड के रहने वाले संताल आदिवासियों के लिए यह घड़ी नई चिंता लेकर आती है। इस समुदाय में ऐसी मान्यता है कि अगर संथाल बच्चों के ऊपर के दांत पहले आ जाएं, तो बच्चे के जीवन में मृत्युदोष सताने लगता है। इस दोष से बचने के लिए यह लोग एक अनोखा अनुष्ठान करते हैं, जिसमें बच्चों की शादी कुत्ते से कर दी जाती है। अगर यह दोष किसी लड़के पर है तो मादा, लड़की हो तो नर पिल्ले के साथ धूमधाम से यह संस्कार पूरा किया जाता है।

कुत्ते के अलावा पेड़ से भी होती है शादी

ऐसी शादियों का दौर सक्रांति से लेकर होली के दूसरे दिन तक निभाया जाता है। इस अनोखी शादी को संथाल आदिवासी सेता बपला कहते हैं, जिसमें सेता का अर्थ कुत्ता और बपला यानी शादी होती है। इस समुदाय में कुत्ते के अलावा बच्चों की शादी पेड़ से भी करके यह दोष मिटाया जाता है। इसमें पेड़ से बच्चों की शादी को सेता बपला की बजाय दैहा बपला कहते हैं, जिसमें दैहा एक ऊंचा पेड़ होता है। कहते हैं सेता बपला या दैहा बपला के बाद बच्चे के जीवन का संकट कुत्ते या उस पेड़ पर चला जाता है, जिसे गांव से कहीं दूर छोड़ दिया जाता है। हालांकि मेडिकल विशेषज्ञ इसे अंधविश्वास बताते हैं।

फोटोग्राफर की दिलेरी, पांच जंगली चीतों के बीच जा कर खींचे फोटो

नई दिल्ली। एक अच्छी वाइल्ड लाइफ फोटो लेने के लिए फोटोग्राफर अपनी जान से किस कदर खेल जाते हैं, यह बात हाल ही में एक फोटोग्राफर द्वारा खींचे गए फोटोज से पता चलता है। बोत्सवाना के एक गेम रिजर्व में चीता और फोटोग्राफर की दिलचस्प तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें के पीछे की हकीकत जानकर कोई भी हैरत में पड़ सकता है।
 
फोटोग्राफर किम वोल्हुटर मशातू बोत्सवाना के गेम रिजर्व में फोटोग्राफी करने गए थे। जिस जगह पर किम फोटो शूट कर रहे थे वहीं पर चीता का एक झुंड उनके पास पहुंच गया। इस दौरान चीता फोटोग्राफर के बेहद करीब पहुंच गया था और इस दौरान उसने अपनी जीभ से फोटोग्राफर के पैर को भी टच किया।
 
 
 
हालांकि जंगली चीता ने फोटोग्राफर पर हमला नहीं किया। किम का कहना है कि वहां पर एक मादा चीता और उसके चार बच्चे थे। सोशल साइट पर वायरल हुई उनकी फोटोग्राफी की इन तस्वीरें को देखकर लोगों ने किम को काफी निडर बताया है। किम 57 साल के हैं और लगातार वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी कर रहे हैं।
 
किम चीतों के बीच रह कर फोटो खींचे और कुछ देर बाद वहां से हट गए। किम ने गेम रिजर्व में करीब 6 हफ्ते का समय बिताया। उनका कहना है कि चीता के मादा बच्चे उनके पैर के पास पहुंच गए थे और जिज्ञासा से देख रहे थे, उस दौरान नर बच्चे थोड़े शांत थे।
 

सेतराऊ का एक धोरा सुनाता है संगीत, नहीं पता चला कारण

बाड़मेर। धोरों की धरती बाड़मेर में माटी के झरने जितने आकर्षक रहे हैं, उतना ही रहस्यमयी है यहां के सेतराऊ� गांव का एक धोरा, जिसकी रेत टकराते ही वाद्य यंत्र जैसी आवाज करती है। यह करिश्मा क्यों है, इस विषय पर भूगोल और भू-गर्भ के विशेषज्ञों की भी समझ जवाब दे जाती है, लेकिन वे मानते हैं कि इस धोरे का फार्मेशन (निर्माण) एेसा है कि रेत आवाज कर सकती है।


सेतराऊ गांव के तीन तरफ पहाडि़यां हैं। इसके बीच में कमांडेंट कल्याणसिंह के खेत में यह धोरा है, जो उनके पथरीली जमीन पर बने पैतृक मकान के ठीक पीछे है। इस धोरे का आकर्षण इसकी रेत का संगीत। इस धोरे की रेत को जैसे ही आपस में टकराते हैं या इस पर दौड़ते हैं तो भपंग जैसी आवाज निकलने लगती है। एेसे लगता है जैसे \'रेत कुछ कहना\' चाहती है। गांव के लोग जमाने से आवाज को सुन रहे हैं।

यह है भौगोलिक विशेषता
 
करीब 15 साल पहले इस रेत के नमूने जांच को भेजे गए थे, लेकिन कोई ठोस वजह सामने नहीं आ सकी। भू वैज्ञानिकों के अनुसार प्रथम दृष्टया यह नजर आता है कि रेगिस्तान से उड़ती हुई यह रेत पहाडि़यों से टकराकर यहां जमा होती गई और धोरे का निर्माण हुआ। यहां निकट में ग्रेनाइट का पत्थर भी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कहीं न कहीं इसमें रेत के साथ अन्य तत्वों का मिश्रण होता गया, जो भौतिक विज्ञान के अनुनाद और प्रतिध्वनि के सिद्धांत को अपना रहा है।

अब तक नहीं पता चला कारण

इस रेत की जांच होती है तो प्रतिध्वनि और अनुनाद के सिद्धांत का कहीं न कहीं कारण होगा। इस धोरे का निर्माण, पास की पहाडि़यां और रेत में कौन-कौन से कण हैं, यह महत्व रखेगा। - एपी गौड़, सचिव, जियोलॉजी एलुमनी एसोसिएशन
यह हमारे गांव की अनमोल थाती है। संगीत देने वाले इस धोरे को जमाने से सुनते आ रहे हैं। कारण क्या है, इसका किसी को पता नहीं है, लेकिन हम गर्व से कहते हैं कि हमारे गांव आओ, यहां तो रेत भी गाती है। - जितेन्द्रसिंह सेतराऊ, सदस्य, इंटेक चेप्टर