सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

गजब! चुड़ैल को उठाकर ले जा रहा था भूत, कैमरे में कैद हुई तस्वीरें

एक तरफ जहां चुैड़ेल और भूत की बातें आजकल के जमाने में अंधविश्वास से कुछ ज्यादा नहीं। लेकिन वहीं ऐसी बातें सुनते ही किसी के भी रोगट खड़े जा जाते हैं, लेकिन अगर वास्तव में ऐसी कोई चीज सामने आ जाए तो क्या हो सकता है, इसका अंदाजा लगाने से ही रूह कांप सकती है। लेकिन हाल ही में एक 55 वर्षीय रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने न सिर्फ भूत और चुड़ैल को देखा बल्कि उनकी तस्वीरें भी क्लिक कर सबकों चौंका दिया। क्रिस हैल्‍टन का कहना है कि वो ब्रिटेन के सबसे डरावने घरों में से एक द केज गए हुए थे। वहां उन्‍होंने घर के पीछे से गुजर रहे रास्‍ते कॉफिन ऐले पर एक तस्‍वीर खींची। उनका दावा है कि वहीं पर उन्‍हें हुड पहना हुआ एक साया दिखा जो स्‍ट्रेचर ले जा रहा था। उसके पीछे-पीछे दो और धुंधले साये थे।
 
 
 
 
आधी रात में दिखे भूत और चुड़ैल
 
द केज नाम की यह डरावनी इमारत इंग्‍लैंड की काउंटी एसेक्‍स के सेंट ओसिथ गांव में स्थित है। एलिजाबेथ के जमाने में यहां जादू-टोने के दोषियों को कैद में रखा जाता था। हैल्‍टन के मुताबिक वह आधी रात तक इमारत के अंदर थे और फिर वहां से वो कॉफिन ऐले की तरफ चल दिए। कहा जाता है कि कैद के दौरान जिन महिलाओं की मौत हो जाती थी उनकी लाशों को इसी रास्‍ते (कॉफिन ऐले) से इमारत से बाहर लाया जाता था। हैल्‍टन के मुताबिक, मैं ठीक आधी रात को इमारत से बाहर आया और कॉफिन ऐले की ओर चलने लगा। मैंने सुना रखा था कि किस तरह रात में इस रास्‍ते का इस्‍तेमाल चुड़ैलों की लाशों को बाहर लाने के लिए किया जाता था ताकि किसी को कानों कान खबर तक न हो सके।
 
 
चुड़ैल को स्ट्रेचर पर ले जा रहा था भूत
 
हैल्टन का कहना है कि कॉफिन ऐले में बहुत अंधेरा था और वहां कोई भी नहीं था। रास्‍ता पूरी तरह से सुनसान था। न तो ट्रैफिक था और न ही दूर-दूर तक कोई इंसान। मैं फ्लैश की मदद से कुछ तस्‍वीरें खींचने लगा। एक तस्‍वीर खींचने के दौरान मुझे कुछ आकृति सी दिखी लेकिन मुझे लगा कि फोटो गड़बड़ हो गई है। जब मैंने घर जाकर ठीक से उस फोटो को देखा तो मुझे साफ-साफ एक साया दिखाई दिया, जिसने हुड पहन रखा था। उसका लिबास एलिजाबेथ के जमाने की तरह था और वह स्‍ट्रेचर ले जा रहा था।
 
 
भूतों को पहली बार किया कैमरे में कैद
 
हैल्टन का कहना है कि उस साये के पीछे दो और धुंधले साए थे और उनका पहनावा मध्‍यकालीन ग्रामीणों की तरह था। उनमें से एक हाथ में लाठी भी थी। पूर्व पुलिस अधिकारी हैल्‍टन के मुताबिक, मैं हैरान था। मैंने पहले भी भूतों की कई तस्‍वीरें देखी हैं लेकिन इस तरह का कुछ पहली बार कैमरे में कैद हुआ था। यह असाधारण था। जब मैंने तस्‍वीर खींची थी तब वहां पर कोई भी नहीं था।
 
फोटो देखकर हैरान हुए लोग
 
हैल्‍टन ने बताया कि कुछ लोग फोटो देखकर हैरान हैं तो कुछ डर भी रहे हैं। आपको बता दें कि इस इमारत की 37 वर्षीय मा‍लकिन वैनेसा मिशेल ने दावा किया था कि यहां उनका सामना 12 भूतों से हुआ था। भूत उन्‍हें पीछे से मारने की कोशिश करते थे, उनके बाल खींचते थे और घर आए मेहमानों को सीढिय़ों से नीचे धकेल देते थे। यही नहीं एक बार तो उन्‍होंने एक साया देखा जो उनके नवजात बेटे के बेड की ओर झांक रहा था। इसके बाद वैनेसा इमारत छोड़ कर चली गईं।
 
रात को आती है अजीबोगरीब आवाजें
 
फिलहाल यहां लेखक मिक्‍की रॉलिंग्‍स रह रहे हैं। वे आजकल सुपरनैचुरल चीजों पर एक बन रही एक डॉक्‍यूमेंट्री पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक,मैं धार्मिक व्यक्ति नहीं हूं लेकिन फिर भी मैं अपनी सुरक्षा के लिए हर रात क्रॉस पकड़कर सोता होता हूं। उनका कहना है, अब मुझे यहां की अजीबोगरीब आवाजें पूरी रात जगाए रखती हैं।
 

उम्र 103 साल, ड्राइवरी 80 साल, एक भी एक्सीडेंट नहीं

103 वर्षीय जियोवन्नी रोजो ब्रिटेन के सबसे पुराने ड्राइवर हैं। वह आठ दशक से बिना एक भी एक्सीडेंट किए हुए गाड़ी चला रहे हैं। जियोवन्नी का जज्बा ऐसा है कि वह इस उम्र में भी ड्राइविंग करने से नहीं हिचकते। ब्रिटेन के कैंब्रिज के रहने वाले जियोवन्नी का आइसक्रीम और दूध का कारोबार है। पिछले साल उनकी पत्नी का निधन हो गया था। इसके बाद से वह हर दिन पहले अपनी पत्नी की कब्र पर और इसके बाद दुकान पर 23 साल पुरानी मित्सुबिशी लांसर कार से जाते हैं। जियोवन्नी की पत्नी नियमित रूप से एक यात्री के रूप में उनकी कार में सफर करती थी।

6 साल ट्रेन भी चलाई

जियोवन्नी ने 30 की उम्र में 26 वर्षीय अन्ना मारिया से इटली में शादी की। इटली से ब्रिटेन आने पर उन्होंने कैंब्रिज को अपना आशियाना बनाया। ब्रिटेन में उन्होंने अपने कॅरिअर की शुरूआत ट्रेन ड्राइवर से की। वह छह साल तक ट्रेन ड्राइवर रहे। इसके बाद उन्होंने एक सहकारी संस्था में मिल्कमैन की नौकरी की।

डिप्लोमा भी मिला 

1962 में जियोवन्नी के लाइसेंस को दुर्घटनाओं से मुक्त होने पर रॉयल सोसायटी ने डिप्लोमा भी दिया। इसके बाद वह सफल आइसक्रीम कारोबारी बन गए। जियोवन्नी के कैंब्रिज में 6 वैन चलती हैं।
oldest driver

ड्राइविंग के लिए नहीं है कोई आयु सीमा

जियोवन्नी ने बताया कि वह 80 साल से कार चला रहे हैं और अभी उनका कार की चाभी को टांगने का कोई इरादा नहीं है। गौरतलब है कि ब्रिटेन में ड्राइविंग के लिए कोई आयुसीमा निर्धारित नहीं है। जियोवन्नी के तीन बच्चे और चार पोते हैं। उन पर इन आठ दशकों के दौरान ड्राइविंग काल में सिर्फ दो बार तेज कार चलाने व एक बार गलत पार्किंग का ही जुर्माना लगा है।

20 की उम्र से शुरूआत

जियोवन्नी ने बताया कि उन्होंने 20 साल की उम्र से ही गाड़ी चलाना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि 1953 में ब्रिटेन आने से पहले वह इटली की सेना में क्लर्क थे और वह 20 साल तक ड्राइविंग की।



अभी भी हैं फिट

जियोवन्नी ने बताया कि वह ब्रिटेन आने के बाद वह कई सालों तक अपनी वैन चलात रहे। उन्होंने कहा कि वह अभी भी फिट हैं और उनकी नजर भी सही है और अभी भी वह अपनी ड्राइविंग को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आते हैं। उन्होंने बताया कि मैनें कई वर्षों पहले मैं पूरे दिन कई-कई मील दूर तक ड्राइविंग करते हुए निकल जाता था वह भी बिना किसी दुर्घटना को अंजाम दिए बगैर। जियोवन्नी ने बताया कि आज भी मेरे लाइसेंस पर कोई एक्सीडेंट का दाग नहीं है।


मात्र 62 लोग हैं दुनिया के आधे संसाधनों के मालिक

अमीर और गरीब के बीच बनी खाई अब इतनी अधिक चौड़ी हो गई है कि दुनिया भर के आधे संसाधनों और धन संपदा पर मात्र 62 अमीरों का कब्जा है। एक तरफ पूरी मानवीय सभ्यता संसाधनों की कमी के कारण कई तरह की मुश्किलों से दो-चार हो रही है तो दूसरी तरफ मात्र 62 लोगों के पास संसाधनों की भरमार है।



एक मैगजीन में प्रकाशित ऑक्सफैम की नई रिपोर्ट के अनुसार 2010 से गरीब आबादी की धन-संपदा में 41 प्रतिशत या 10 खरब डॉलर की गिरावट आई है, जिससे ये पहले की अपेक्षा और अधिक गरीब हो गए हैं, जबकि अमीरों के धन में 17.60 खरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। \'एन इकॉनोमी फॅार द 1%\' शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर अमीरों और गरीबों की बीच की यह खाई पिछले एक साल में अधिक बढ़ी है।

वर्ष 2011 में दुनिया भर के 388 अमीरों के पास दुनिया के आधे संसाधन थे। उसके बाद अमीरों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जाती रही। वर्ष 2014 में यह संख्या 80 थी तो 2015 में यह और अधिक गिरकर मात्र 62 हो गई। ऑक्सफैम के प्रमुख मार्क गोल्डरिंग के अनुसार एक ऐसी दुनिया में जहां हर नौ में से एक व्यक्ति हर रात भूखे पेट सोता हो, वहां इन अमीर लोगों को केक का सबसे बड़ा टुकड़ा देना सहज नहीं है।


नोट बटोरने का अजीब कंपिटीशन, जितने हाथ आए उतने ले जाओ

अब आपने एक से बढ़कर एक कंपिटीशन के बारे में सुना और देखा होगा, लेनिक ऐसा कंपिटीशन नहीं देखा होगा जिसमें लोगों को खुले में नोट बटोरने का चैलेंज दिया गया होग। चीन के झेजियांग प्रांत में हुए इस नोट बटोरने वाले अनोखे कंपिटीशन की अभी खूब चर्चा हो रही है।
 
 
 
 
1 मिनट में बटोरने थे नोट
 
इस अनोखे कंपिटीशन की शर्त यह थी कि लोगों एक मिनट में ज्यादा से ज्यादा युआन बटोरने थे। कंपिटीशन के लिए पांच मिलियन युआन (करीब पांच करोड़ रुपए) कांच के कमरे में रखे गए थे। नोटों से भरे इस कमरे में से जो सबसे ज्यादा नोट बटारेगा उसें ईनाम दिए जाने घोषणा की गई थी।
 
ऐसा था कंपिटीशन
 
चीन के सोंगछेंग ग्रुप ने 10 दिन पहले अपने ऑफिशियल अकाउंट से वीचैट पर लोगों को इस इवेंट की जानकारी दी थी। इसके लिए 10 टूरिस्ट्स को हेंगझोऊ बुलाया गया था। कोझोऊ शहर की एक महिला इस इवेंट में विनर रही। उसने एक मिनट में 18,300 युआन जीते।
 
टूरिस्ट को शुक्रिया करने के लिए आयोजित हुआ इवेंट
 
इवेंट ऑर्गेनाइजर ने कहा कि इस इवेंट का आयोजन टूरिस्ट्स के प्रति शुक्रिया जताने के उद्देश्य से किया गया था।
 

वर्जिनिटी बताने वाली छात्राओं को इस शहर की मेयर दे रही स्कॉलरशिप

साउथ अफ्रीका के उथूकेला जिले की महिला मेयर वर्जिनिटी रखने वाली स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए स्कॉलरशिप देने की अनोखी पहल की शुरूआत की है। मेयर डूडू मोजिबूको ने हाल ही में अपनी वर्जिनिटी साबित करने वाली 16 जवान छात्राओं को स्कॉलरशिप देकर इस योजना की शुरूआत की है।
 
 
 
हर साल मिलेगी स्कॉलरशिप
 
साउथ अफ्रीका के क्वाजूलू-नाटाल राज्य के उथूकेला जिले की इस मेयर के ऑफिस द्वारा प्रत्येक साल ऐसी 100 से ज्यादा छात्राओं को स्कॉलरशिप देने की बात कही हैं। हालांकि स्कॉलरशिप पाने वाली छात्राओं को पहले अपनी वर्जिनिटी साबित करनी होगी।
 
आगे भी रहना होगा वर्जिन
 
हालांकि वर्जिनिटी साबित कर स्कॉलरिशप पाने वाली छात्राओं की स्कॉलरशिप तब ही आगे के चालू रहेगी जब तक वो अपनी वर्जिनिटी कायम रखेंगी। इसके लिए मेयर ने भी छात्राओं को धन्यवाद दिया।
 
जल्द प्रेग्नेंट होने की है समस्या
 
दक्षिण अफ्रीका की इस मेयर ने यह अनोखी स्कीम वहां के हालात को देखते हुए उठाया है। दक्षिण अफ्रीका के बेसिक एजुकेशन डिपार्टमेंट के अनुसार लगभग साल 2014 में 20000 छात्राएं और जवान महिलाएं प्रेग्नेंट हुई थी। इनमें से 223 लड़कियां तो ऐसी है जो अभी प्राथमिक स्कूल में पढ़ रही हैं। इसके अलावा वहां के घरेलू सर्वे में पता चला है कि 2013 में दक्षिण अफ्रीका की 14 से 19 साल में ही 5.6 फीसदी लड़कियां प्रेग्नेंट हुई थी।
 
वर्जिनिटी टेस्ट संविधान के खिलाफ नहीं
 
मेयर डूडू मोजिबूको की पहल को इसलिए भी बल मिल रहा है, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के संविधान में वर्जिनिटी टेस्ट गलत नहीं बताया गया है। हालांकि मेयर की पहल की कई लोगों द्वारा यह कहकर अवलोचना भी की गई है, यह संस्कृति के विपरीत हैं। हालांकि मेयर ने अपनी ओर से कहा कि छात्राओं को आधुनिकता का ज्ञान कराने, उनकी सेहत बनाने समेत एचआईवी और एड्स से भी बचाय जा सकता सकता है।
 

चॉकलेट खाकर हुई थीं मोटी, जानिए एक आइडिया ने कैसे बनाया बॉडी बिल्‍डर


दो बच्‍चों की मां नथालिया टेक्‍िसरिया रोजाना लगभग पांच हजार कैलोरी के जितनी चॉकलेट खाकर मोटापे की शिकार हो गईं थी। अब फास्‍ट फूड और जंक फूड को छोड़कर वह बॉडी बिल्‍डर बन गई हैं। उन्‍होंने अपने थुलथुले शरीर का वीडियो पोस्‍ट करके लोगों से टिप्‍पणी करने को कहा। यह अजीब तरीका कारगर साबित हुआ और उन्‍होंने इस पर काम करते हुए अपने शरीर को परफेक्‍ट टोन में ढाल दिया।
 
उन्‍होंने बताया कि वह शादी के पहले चिप्‍स के साथ ही जंक फूड और फास्‍ट फूड खाने के लिए दीवानी रहती थीं। इसके चलते उनका वजन काफी बढ़ गया था और शरीर भी बेडौल हो गया था। मगर, इससे उन्‍हें परेशानी महसूस होने लगी और उन्‍होंने मोटापे से छुटकारा पाने का फैसला किया। न्‍यूयॉर्क के प्‍लाजा कॉलेज में पीचएडी साइकोलॉजी की छात्रा नथालिया मूल रूप से ब्राजील की रहने वाली हैं।
 
वह बताती हैं कि अब उनके शरीर में स्‍ट्रेंच माक्‍र्स दिखते हैं, लेकिन वह इसे लेकर परेशान नहीं हैं क्‍योंकि यह उनकी कहानी का ही हिस्‍सा हैं। उन्‍होंने बताया कि वह रोजना पांच हजार कैलोरी जितना फास्‍ट फूड खाती थीं, जिसमें से अधिकांश चॉकलेट होती थी। इससे उनका बेडौल होना लाजिमी था, लेकिन अब वह अपने परफेक्‍ट शेप को लेकर खुश हैं।
 

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नहीं पसंद आया सांभर और रस्सम तो दूल्हे ने तोड़ दी शादी


क्या आपने कभी खाना पसंद न आने पर शादी टूटते देखा है। ऐसा कर्नाटक के तुमकुरु जिले के कुनिगल में हुआ। यहां शादी समारोह में आए 300 मेहमान उस समय सकते में आ गए जब 27 वर्षीय दूल्हे ने अचानक ही शादी से मना कर दिया।
शादी से पीछे हटने का कारण था दूल्हे के परिवार को शादी में परोसा गया रस्सम और सांभर।



दूल्हा बेंगलूरु का रहने वाला था और उसे व उसके परिवार को खाना पसंद नहीं आया। शादी में शरीक हुए लोगों के मुताबिक दूल्हे के घरवालों ने पहले तो इस छोटी सी बात पर दुल्हन के परिवार वालों से झगड़ा किया। इस झगड़े में दूल्हे ने भी अपने माता-पिता का ही पक्ष लिया और पूरा परिवार शादी छोड़ कर चला गया।

शादी टूटने के बाद दुल्हन के पिता ने वहां मौजूद मेहमानों से अपील की कि अगर कोई उनकी बेटी से शादी करने को तैयार है तो आगे आए। लड़की का ही एक दूर का रिश्तेदार आगे आया और परिवार को संकट से उबारते हुए कहा कि वह शादी के लिए तैयार है। इसके बाद दोनों की शादी करवा दी गई।


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