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शनिवार, 30 जनवरी 2016

मुखिया की हुई मौत तो कटेगी महिलाओं-बच्चों की उंगलियां!

आपने इस दुनिया के कई देशों में प्रचलित प्रथाओं और परंपराओं के बारे में सुना होगा, लेकिन इसके बारे में नहीं, क्योंकि इस प्रथा के शिकार पर जो गुजरता है उसका अंदाजा लगाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा प्रतीत होता है। यह एक ऎसी जगह है जहां यह भयावह प्रथा प्रचलित है। इस प्रथा के तहत परिवार के मुखिया की मौत हो जाने पर उसके परिवार से संबंधित सभी महिलाओं और बच्चों की उंगलिया कुल्हाड़ी काटी जाती है।



पापुआ न्यू गिनिया है होता है ऎसा
मुखिया की मौत होने पर परिवार की महिलाओं और बच्चों की उंगलियां काटने की यह प्रथा पापुआ न्यू गिनिया में रहने वाली डेनी प्रजाति के परिवारों में है। जिसके शिकार हजारों लोग हो चुके हैं।
मृत व्यक्ति के दुखों का होता है बंटवारा
मुखिया की मौत हो जाने पर परिवार की स्त्रियों और बच्चों की उंगलियां कटवाने के पीछे का कारण भी बड़ा अजीब है। डेनी प्रजाति के लोगों का मानना है कि उंगलिया काटने पर मृत्यु को प्राप्त हुए मुखिया की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा महिलाओं और बच्चे उंगलियां कटवाकर मरे हुए मुखिया के उस कष्ट में भागीदार बनते हैं जो उसने मरते समय उठाया था।
सरकार ने लगाई पूरी तरह से रोक
हालांकि उंगलियां काटने की इस प्रथा पर अब न्यू गिनीया सरकार द्वारा पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार ने इस प्रथा पर प्रतिबंध इस तर्क के आधार पर लगाया है कि यह अमानवीय है और मरने वाले दु:ख में कोई भी अपने शरीर का अंग कटवाकर उसमें भागीदार नहीं हो सकता। लेकिन अभी इस प्रथा के शिकार हुए सैंकड़ों लोग वहां बचे हुए है जिनके हाथों की उंगलियां कटी हुई है।

अनोखी है यहां की परंपरा, जिंदा आदमी खुद को बनाता है ममी

आपने अब तक कई तरह के रीति-रिवाजों के बारे में सुना होगा, लेकिन ऎसा नहीं, क्योंकि यह सबसे अनोखा और भयानक है। हम आपको बता रहे है दुनिया के एक ऎसे देश के बारे में जहां प्रचलित एक अनोखी और भयावह पंरपरा के बारे में जहां एक जिंदा इंसान अपने आपको ममी बना देता है। इसके लिए उसे अपने आपको जीते जी ही कीड़ों-मकोड़ों का भोजन बनाना होता है।
 
 
 
जापान में होता है ऎसा-
 
जिंदा इंसान को ममी बनाने की यह परंपरा जापान में हैं। इस देश के उत्तरी भाग में कई ऎसे बौध मठ है जिनमें सोकूशिंबूत्सु नाम से जाने जाने वाले बौद्ध भिक्षु ऎसा करते हैं। इस संप्रदाय में सैंकड़ों सालों से होता आ रहा है तथा कई भिक्षु जीते जी अपने आपको ममी बना चुके हैं। हालांकि ऎसा करने में सफल होने वाले भिक्षु को भगवान के बराबर दर्जा दिया जाता है और उसकी पूजा होती है।
 
बौद्ध भिक्षु ने शुरू की थी परंपरा-
 
जीते जी इंसान को ममी बनाने की यह परंपरा आज से लगभग 1000 साल पहले कूकाई नाम के एक पुजारी ने वाकायामा प्रांत के माउंट कोया स्थित मंदिर से शुरू की थी। कूकाई ने ही बौद्ध धर्म में शिंगोन नाम से एक पंथ की स्थापना भी की थी। इसके बाद इस पंथ को मानने वाले बौद्ध भिक्षुओं में इस परंपरा का चलन बढ़ता ही गया और एक के बाद एक सैंकड़ों जिंदा भिक्षु ममी बनते गए।
 
पहले करनी होती है प्रेक्टिस-
 
जिंदा इंसान का ममी बनना कोई आसान काम नहीं, बल्कि इसके लिए पहले कई सालों तक प्रेक्टिस करनी होती है। जिस भिक्षु को ममी बनना होता है उसे पहले इसकी घोषणा करनी होती है। इसके बाद से ही उसे अगले 1000 दिनों तक स्पेशल डाइट पर रहना होता है जिसमें उसे खाने के लिए फली के बीज और अन्य कई तरह के बीज दिए जाते हैं। इस कठोर आहार नियम का पालने पर शरीर की सारी चर्बी निकल जाती है। इसके बाद फिर अगले 1000 दिनों तक उस भिक्षु को ऊरूषी नाम से वृक्ष से बनी जहरीली चाय पिलाई जाती है। इससे उस भिक्षु को जबरदस्त उल्टियों होती है तथा शरीर का सारा पानी, खून और तरल पदार्थ सूख जाता है और बचती है तो केवल चमड़ी और हडि्डयां।
 
पूजा जाता है भगवान की तरह-
 
हडि्डयों के ढ़ांचे बन चुके भिक्षु में फिर भी प्राण होते हैं। इसके बाद शुरू होती है असली सेल्फ ममीफिकेशन की प्रक्रिया। जी हां, इसके बाद उस भिक्षु को पत्थर से बनी एक छोटी सी समाधि में हवा का एक सुराख बनाकर एक ही मुद्रा में बैठाकर बंद कर दिया जाता है। इसके बाद उसे दूसरी दुनिया का इंसान मान लिया जाता है। फिर वो भिक्षु जब तक प्राण रहते हैं तब तक रोज घंटी बजाकर यह बताता है कि वो अभी जिंदा है। जिस दिन घंटी बजना बंद हो जाती है उस दिन समाधि में हवा के सुराख को भी बंद कर अगले 1000 दिन तक फिर सील कर दिया जाता है। यह समय गुजरने पर उस भिक्षु को फिर से वापस निकाला जाता है और उसका ममीफिकेशन पूरा होना मान लिया जाता है। उसे दर्शनों के लिए मंदिर में लेजाकर रख दिया जाता है और पूजा की जाती है। हालांकि आपको बता दें कि जापान की सरकार ने अब इस परंपरा अब रोक लगा दी है।
 

यहां दुल्हन को गोद में लेकर गुजरना होता है अंगारों से!

भारत में जहां शादी होने के बाद दूल्हा अपनी नई नवेली दुल्हन को हाथ पकड़कर घर में बड़ी आसानी गृह प्रवेश कराता है, वहीं इस दुनिया में एक देश ऎसा भी है जहां दुल्हन को घर में प्रवेश कराने से पहले दूल्हे की जान पर ही बन आती है। यहां नवेली दुल्हन को घर में प्रवेश कराने से पहले दूल्हे को उसे अपनी गोद या पीठ पर बिठाकर दहकते अंगारों से होकर गुजरना होता है।



बहुत पुरानी है परंपरा-

दूल्हे के घर में पहली बार प्रवेश करने से दूल्हे द्वारा दुल्हन को गोद में लेकर अंगारों से गुजारने की यह परंपरा चीन में है और बहुत ही पुरानी है।

प्रसव पीड़ा से बचाने के लिए होता है ऎसा-

दुल्हन को गोद में लेकर दूल्हे द्वारा दहकते अंगारों से होकर गुजरने की इस परंपरा के पीछे का कारण भी चौंकाने वाला है। ऎसा माना जाता है कि दूल्हे द्वारा ऎसा करने पर दुल्हन के प्रेग्नेंट होने के बाद उसे प्रसव के दौरान होने वाली पीड़ा से मुक्ति मिल जाती है।