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सोमवार, 4 अप्रैल 2016

Black Money : Those who ignored compliance window will pay soon, says Jaitley

काले धन का खुद से खुलासा ना करना पड़ेगा महंगा : जेटली 


पनामा में छिपे काले धन का खुलासा सोमवार को होने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जिन लोगों ने विदेशों में अपनी अघोषित आय व संपत्तियों का हिसाब देने के लिए सरकार की ओर से पिछले साल उपलब्ध करवाए गए अवसर का लाभ नहीं उठाया, उन्हें उनका यह खिलावाड़ बहुत महंगा पड़ेगा।



जेटली ने कहा कि विदेशों में कालाधन छुपाने वालों के खिलाफ वैश्विक पहले के तहत की जा रही बहुपक्षीय व्यवस्था 2017 तक प्रभावी हो जाएगी और उसके बाद लोगों के लिए अपनी गैर कानूनी संपत्ति बाहर छुपाना बहुत मुश्किल होगा। जेटली ने यह बयान पनामा पेपर्स के खुलासे में 500 से अधिक भारतीयों का जिक्र आने पर दिया।

गौरतलब है कि सरकार ने अघोषित विदेशी आय व आस्ति कर अधिरोपण अधिनियम 2015 के तहत भारतीयों को विदेशों में रखी किसी अघोषित संपत्ति का खुलासा करने के लिए अपना नाम गुप्त रखने की सुविधा के साथ 90 दिन का अवसर दिया था। इस अवसर की अवधि गत 30 सितंबर को समाप्त हो गई। इसके तहत घोषणा करने वाले को घोषित संपत्ति के लिए 30 प्रतिशत कर और 30 प्रतिशत जुर्माना देना था।

गुरुवार, 17 मार्च 2016

Every penny from Vijay Mallya will be recovered: Arun Jaitley

विजय माल्या से एक-एक पैसे की वसूली करेंगे: अरुण जेटली 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि दिवालिया घोषित कारोबारी विजय माल्या जैसे मामलों से देश के बैंकिंग सेक्टर की बदनामी हुई है। जेटली ने यहां एक निजी मीडिया हाउस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विजय माल्या के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि हमने बैंकों से कहा है कि वे माल्या से एक-एक पैसे की वसूली करें। माल्या के मामले से देश और बैंकिंग सेक्टर की इमेज खराब हुई है। अगर हम इसका इलाज नहीं करेंगे तो ये देश के फ्यूचर के लिए खतरनाक होगा।




उन्होंने कहा कि गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की समस्या दो कारणों से है। इस समस्या का एक हिस्सा यह है कि अर्थव्यवस्था के कुछ सेक्टरों जैसे, इस्पात, कपड़ा, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि में मंदी है। कुछ समस्याएं राज्य सरकारों की तरफ से भी है, विशेषकर बिजली वितरण कंपनियों से संबंधित। उन्होंने कहा कि जब इन सेक्टरों में दुबारा तेजी लौटेगी तो ये एनपीए नहीं रहेंगे। इनके समाधान के लिए इन सेक्टरों को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि दूसरी श्रेणी वह है जिसमें कुछ विशेष कंपनियों एवं पूँजीपतियों को बड़े कर्ज दिये गये। इनमें संभवत: पर्याप्त सिक्यूरिटी भी नहीं ली गई। यह चिंता का विषय है। मेरी समझ से इन मामलों को सेक्टर की मंदी के कारण बने एनपीए से अलग करके देखने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ये ऐसे मामले हैं जो वास्तव में चिंता का विषय हैं क्योंकि इनमें कर्ज के साथ नैतिक पहलू भी जुड़ा है। इससे देश के बैंकिंग सेक्टर की बदनामी हुई है। यदि आप इसका समाधान नहीं ढूढ़ सकते तो यह भविष्य के लिए नुकसानदेह होगा।Þ श्री माल्या पर बैंकों का नौ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया है। उनकी विमान सेवा कंपनी किंगफिशर दिवालिया और कंपनी-माल्या विल्फुल डिफॉल्टर घोषित किए जा चुके हैं। फिलहाल वह देश से बाहर हैं और कहा जा रहा था वह देश छोड़कर भाग गये हैं, लेकिन उन्होंने इसका खंडन किया है।